दिल्ली के अभिश्रापित तुग़लकाबाद किले का इतिहास

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तुगलकाबाद किला भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। इस ने अतीत में ज़रूर बहुत शानदार दिन देखे होंगे। लेकिन बीतते समय के साथ इसकी शान जल्दी ही फ़ीकी पड़ गई और ये बस एक खण्डर बन कर रह गया।

छह शताब्दियों से अधिक पुराने इतिहास के साथ, इस प्राचीन किला का दिल्ली के देखने लायक ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों  की सूची में शामिल होना ज़रूरी है।

तुगलकाबाद का किला अब जर्जर हालत में खड़े खंडहरों से ज्यादा कुछ नहीं है। जो लोग इतिहास, कहानियों, वास्तुकला और फोटोग्राफी में रुचि रखते हैं वे इस जगह को ज़रूर पसंद करेंगे।

इस पोस्ट में आप जानेंगे कि –

  • तुगलकाबाद किला कहाँ स्थित है?
  • तुगलकाबाद किले तक कैसे पहुँचें?
  • प्रवेश शुल्क और समय
  • तुगलकाबाद शहर का निर्माण किसने किया था?
  • तुगलकाबाद किला क्यों बनाया गया था?
  • तुगलकाबाद किले को क्यों छोड़ा गया?
  • किसने कहा “दिल्ली अभी भी दूर है”? किसने कहा “अभि दिली दरवाजा है”?
  • क्या तुगलकाबाद किले में अलौकिक शक्तियों का साया है?
  • तुगलकाबाद किले में जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?
  • तुगलकाबाद किले का दौरा करने में कितना समय लगता है?
  • क्या यह व्हीलचेयर के अनुकूल है?
  • तुगलकाबाद क़िला देखने जाने के लिए टिप्स

तुगलकाबाद किला कहाँ स्थित है?

तुगलकाबाद किला दिल्ली के तुगलकाबाद में महरौली-बदरपुर मार्ग पर स्थित है। यह एक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला का एक हिस्सा है।

डॉक्टर कर्णी सिंह शूटिंग रेंज और ओखला इंडस्ट्रियल एरिया भी पास में स्थित है। सरिस्का बाघ अभयारण्य (सरिस्का टाइगर रिज़र्व) से दिल्ली तक फैला महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्र (बायोडायवर्सिटी एरिया) आसपास के क्षेत्र में है।

तुगलकाबाद किला निकटतम मेट्रो स्टेशन

आप ऑटो या कैब से तुगलकाबाद किले तक पहुँच सकते हैं। या निकटतम मेट्रो स्टेशन, गोविंदपुरी के लिए मेट्रो ली जा सकती है। गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन से तुगलकाबाद किले पर पहुंचने के लिए ऑटो लिया जा सकता है। किले के परिसर में कारों के लिए पर्याप्त पार्किंग स्थान है। डीटीसी बस से भी यहाँ पहुंचा जा सकता है जो महरौली बदरपुर रोड पर नियमित रूप से चलती हैं।

तुगलकाबाद किला प्रवेश शुल्क: भारतीयों के लिए 30 रुपये प्रति व्यक्ति, विदेशियों के लिए 300 रुपये प्रति व्यक्ति

तुगलकाबाद किला समय: सप्ताह के सभी दिन सुबह 6:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक।

तुगलकाबाद किला पता: महरौली बदरपुर रोड, तुगलकाबाद, दिल्ली

तुगलकाबाद शहर का निर्माण किसने किया था? तुगलकाबाद किला क्यों बनाया गया था?

तुगलकाबाद को सुल्तान ग्यासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश के लिए अपनी राजधानी के रूप में बनाया था। इस मजबूत विशाल किले के निर्माण का मुख्य उद्देश्य मंगोल आक्रमणकारियों से सुल्तान और सल्तनत की रक्षा करना था।

इस किले का निर्माण 1321 में शुरू हुआ था और यह केवल 4 वर्षों में पूरा हो गया था।

लेकिन दुर्भाग्य से, किले ने ज़्यादा देर तक अच्छा समय नहीं देखा और 1327 में जल्द ही ये वीरान हो गया।

इस ऐतिहासिक किले के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार गाजी मलिक (जिसे बाद में गयासुद्दीन तुगलक के नाम से जाना जाता था) ने अपने खिलजी मालिक को दिल्ली के दक्षिण में एक पहाड़ी पर एक किले का निर्माण करने का सुझाव दिया।

राजा ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि जब वह खुद राजा बन जाए तो उस स्थान पर अपने लिए एक किला बना ले।

जैसा कि भाग्य में लिखा था, खिलजियों के बाद, गाजी मलिक ने ‘घियासुद्दीन तुगलक’ की उपाधि धारण की और तुगलक वंश की स्थापना की।

इसके तुरंत बाद, उसने अपने सपनों के शहर का निर्माण शुरू किया- तुगलकाबाद, उसी स्थान पर जहाँ उसने इसकी कल्पना की थी।

किले के चारों ओर की दीवारें 10-15 मीटर ऊंची और कुछ मीटर मोटी थीं। ये बड़े-बड़े पत्थरों का उपयोग करके बनाई गईं थीं। किले का निर्माण इस तरह से किया गया था कि ये बहुत मज़बूत और भव्य दिखाई दे।

किले की बनावट आयताकार प्रतीत होती है और इसे तीन भागों में विभाजित किया गया है।

एक भाग में पुराने घर बने हुए लगते हैं, फिर एक महल है और तीसरा एक आयताकार संलग्न क्षेत्र है जो गढ़ के रूप में उपयोग किया जाता होगा।

माना जाता है कि इस शहर में 52 द्वार थे लेकिन अब केवल 13 ही शेष रह गए हैं।

किले में मकानों, बाजारों, पानी की टंकियों, भूमिगत मार्ग आदि के अवशेष हैं। ये भूमिगत मार्ग वो गुप्त मार्ग हो सकते हैं जो जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए राजघरानों द्वारा उपयोग किए जाते थे।

एक बड़ा खुला स्थान है जहाँ से किले का सम्पूर्ण दृश्य देखा जा सकता है। यह किला लगभग 6.5 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है।

गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा एक अलग प्रांगण में स्थित है।

एक रास्ता सूखी हुई झील की ओर जाता है जहाँ घियासुद्दीन तुगलक की कब्र है। अंदर तीन कब्रें हैं- एक उसकी खुद की और बाकी  दो उसकी पत्नी और बेटे की मानी जाती है।

मकबरा, लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना सरल लेकिन सुन्दर ढांचा है।

विशाल पत्थर की दीवारें इस प्राचीन शहर को घेरती हैं जिसमें तुगलक वास्तुकला के स्मारकों की विशिष्ट विशेषताएं थीं। हालांकि अधिकांश किला खंडहर में तब्दील हो चुका है लेकिन ये जगह काफी साफ-सुथरी दिखती है।

आदिलाबाद का किला जो गयासुद्दीन के उत्तराधिकारी मोहम्मद-बिन-तुगलक द्वारा वर्षों बाद बनवाया गया था, तुगलकाबाद किले से दिखाई देता है।

यह किला तुगलकाबाद किले की शैली से मिलता-जुलता है, लेकिन उससे छोटे पैमाने पर बनाया गया है।

तुगलकाबाद किला एक संरक्षित स्मारक है जिसका अर्थ है कि इसे प्राचीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों और अवशेष अधिनियम 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act 1958) के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया है। इसलिए, किसी भी तरीके से इसे नष्ट करना या इसे नुक्सान पहुँचाना दंडनीय है।

तुगलकाबाद किले को क्यों छोड़ा गया?

जब गयासुद्दीन तुगलक सुल्तान बन गया, तो वह इस किले के निर्माण के अपने सपने को पूरा करने में जुट गया।

उसने एक आदेश जारी किया कि दिल्ली के सभी मजदूरों को उसके किले के लिए काम करना होगा। एक सूफी संत निजामुद्दीन औलिया अपनी बावली (बावड़ी) पर काम करवा रहे थे, जिसे सुल्तान के इन आदेशों के कारण बीच में रोकना पड़ा।

इससे परेशान होकर, संत ने सुल्तान के किले को “यां रहे उज्जड़ , यां बसे गुज्जर” कह कर शाप दिया, जिसका अर्थ है “या तो (यह) उजाड़ रहेगा या यहाँ आदिवासियों/बंजारों का वास होगा”।

और यह आज भी वैसे ही है – उजड़ा, वीरान और खंडहर । आपको कुछ जगह बंदर या बकरियां ज़रूर दिख सकती हैं।

किसने कहा कि दिल्ली अभी भी दूर है?

किंवदंती है कि सुल्तान ग़यासुद्दीन तुगलक सूफी संत निज़ामुद्दीन औलिया को नापसंद करता था क्योंकि वह बहुत सम्मानित और प्रशंसित व्यक्ति थे।

ग़यासुद्दीन सल्तनत का शासक था पर निज़ामुद्दीन आम लोगों में बहुत लोकप्रिय थे।

जब गयासुद्दीन बंगाल में था, तो उसने संत निज़ामुद्दीन औलिया को धमकी भरा सन्देश भेजा कि वह उसके आने से पहले दिल्ली छोड़ दें।

तब संत ने फ़ारसी में इन शब्दों का उच्चारण किया “हुनूज़ दल्ली दूर अस्त” जिसका अर्थ है “दिल्ली अभी दूर है”।

सुल्तान के दिल्ली पहुँचने से पहले ही एक दुर्घटना हो गई जिसमें उसकी जान चली गई। इसके बाद, यह कहावत प्रचलित हो गई “दिल्ली अभी दूर है” जिसका अर्थ है मंज़िल अभी दूर है।

क्या तुगलकाबाद किले में अलौकिक शक्तियों का साया है?

तुगलकाबाद किले के भूतिया होने के बारे में कई कहानियाँ प्रचलित हैं। ये किला एकांत में स्थित है और सदियों से खंडहर हो चुका है।

यह ज़्यादा लोकप्रिय पर्यटन स्थल नहीं है, इसलिए यहाँ दिल्ली के अन्य पर्यटन स्थलों की तुलना में ज़्यादा पर्यटक नहीं आते हैं। इस जगह का परिवेश कुछ लोगों में नकारात्मक भाव जगा सकता है।

सूफी संत के अभिशाप की वजह से लोग यह मानते हैं कि यह मनुष्यों के रहने लायक जगह नहीं है। यह भी माना जाता है कि इस किले में कई लोगों को मौत की सजा दी गई थी।

सदियों पुरानी चली आ रही कहानियों और मान्यताओं में गहरा विश्वास रखने वाले लोग इस किले को भूतिया या अलौकिक गतिविधियों का स्थल मानते हैं।

तुगलकाबाद किले जाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

तुगलकाबाद किले की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च एक अच्छा समय है। दिल्ली गर्मियों के दौरान बेहद गर्म हो जाती है। इसलिए, ये मौसम यहाँ की यात्रा के लिए अच्छा समय नहीं है।

तुगलकाबाद घूमने में कितना समय लगता है?

इस स्थान के लिए एक से दो घंटे का समय पर्याप्त है।

क्या तुगलकाबाद (wheelchair friendly) व्हीलचेयर फ्रेंडली है?

नहीं, किले का निर्माण उबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके पर किया गया है और यह व्हीलचेयर के अनुकूल नहीं है।

तुगलकाबाद किले पर जाने के लिए टिप्स

  • यह स्थान एक निर्जन क्षेत्र में स्थित है, इसलिए दोस्तों या परिवार के साथ जाना बेहतर है। यह सैर या पिकनिक के लिए उपयुक्त स्थान है।
  • आरामदायक जूते पहनें क्योंकि इस यात्रा में काफी पैदल चलना पड़ेगा।
  • पीने का पानी और कुछ खाने के लिए साथ ले जाएं क्योंकि अंदर कोई रेस्तरां या खाने की दुकानें नहीं हैं।
  • यह विशेष रूप से गर्मियों में दिन के समय बहुत गर्म हो सकता है इसलिए इस स्थान पर सुबह जाना बेहतर है। अपने धूप के चश्मे को साथ रखें।
  • जिन लोगों को चलने में कठिनाई हो उनके लिए ये जगह उपयुक्त नहीं है।
  • अंदर शौचालय (टॉयलेट) की कोई सुविधा नहीं है इसलिए इस जगह पर आने से पहले शौचालय का उपयोग करना बेहतर है।
  • थोड़ा कम लोकप्रिय स्थल होने के कारण यहाँ भीड़ कम रहती है और ये फोटोग्राफी के लिए बढ़िया है।
  • आप टिकट का भुगतान नकद या कैशलेस तरीके से कर सकते हैं। कैशलेस भुगतान आपको प्रवेश शुल्क पर कुछ छूट प्रदान करता है। भुगतान के लिए कुछ खुले पैसे (करेंसी नोट) साथ रखें।

आप इस पोस्ट को अंग्रेजी में यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं – Tughlaqabad Fort: Things to know before you go to this Haunted(?), Historic place.

तुगलकाबाद किला, भारत की राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद में महरौली-बदरपुर मार्ग पर स्थित है। यह एक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला का एक हिस्सा है।तुगलकाबाद का किला अब जर्जर हालत में खड़े खंडहरों से ज्यादा कुछ नहीं है। जो लोग इतिहास, कहानियों, वास्तुकला और फोटोग्राफी में रुचि रखते हैं वे इस जगह को ज़रूर पसंद करेंगे #lighttravelaction #incredibleindia #अतुल्यभारत #hindiblog #hinditravelblog #delhiindiatravel #delhiindiathingstodo #Tughlaqabadfort #fortsofindia
तुगलकाबाद किला, भारत की राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद में महरौली-बदरपुर मार्ग पर स्थित है। यह एक चट्टानी पहाड़ी पर स्थित है, जो अरावली पर्वत श्रृंखला का एक हिस्सा है।तुगलकाबाद का किला अब जर्जर हालत में खड़े खंडहरों से ज्यादा कुछ नहीं है। जो लोग इतिहास, कहानियों, वास्तुकला और फोटोग्राफी में रुचि रखते हैं वे इस जगह को ज़रूर पसंद करेंगे #lighttravelaction #incredibleindia #अतुल्यभारत #hindiblog #hinditravelblog #delhiindiatravel #delhiindiathingstodo #Tughlaqabadfort #fortsofindia

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