आगरे का किला क्यों प्रसिद्ध है और आपको इसे क्यों देखना चाहिए!

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मैं उन लोगों में से बिल्कुल नहीं हूँ जो घूमने का कोई भी मौका गँवा दें। तो जब एक दोस्त ने अपने आगरा जाने के प्लान के बारे में बताते हुए मुझसे पूछा कि क्या मैं उसके साथ आगरा चलना चाहूँगी तो मैंने ‘हाँ’ करने में देर नहीं की। यह कई साल पहले की बात है जब मैंने सोलो ट्रैवल करना शुरू नहीं किया था।

इस ट्रिप पर जाने का मेरा एक ही मकसद था- ताज महल देखना, जो हमने देखा भी। मैंने आज तक जितनी भी इमारतें देखी हैं उनमें से ताज महल मुझे सबसे ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगा। ताज महल के बाद जब हमने आगरे का किला देखने की सोची तो मुझे कोई ख़ास उत्सुकता या उम्मीदें नहीं थी लेकिन जल्द ही मेरी यह सोच बदल गई।

आगरा के क़िले का अधिकतर हिस्सा आम लोगों के लिए बंद है लेकिन जितना भी मैंने देखा उससे मुझे खुशी ही हुई कि हमने इसे देखने का प्लान बनाया। 

आगरे का किला क्यों प्रसिद्ध है और आपको इसे क्यों देखना चाहिए

आगरे का किला वास्तुशिल्प का एक नायाब नमूना है जिसमें मुग़ल और पर्शियन वास्तुकला का बेहद खूबसूरत मेल है। इसमें कहीं-कहीं ग्वालियर, बंगाली और राजस्थानी वास्तुकला का असर भी दिखाई देता है। अलग-अलग शासकों के राज के दौरान इस क़िले में बहुत से बदलाव हुए जो आज भी देखे जा सकते हैं।

कला, वास्तुशिल्प और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आगरे का किला एक बार तो ज़रूर देखना चाहिए। लाल पत्थर और सफेद संगमरमर से बने इस क़िले के खूबसूरत डिज़ाइन, नक्काशी और शिल्प इतना खूबसूरत है कि क़िले में घुसते ही मेरी नज़र जैसे बस इन पर ही टिक गई।

जिस जगह पर आगरे का किला बना हुआ है, इसे पहले बादलगढ़ नाम से जाना जाता था। 1526 ईस्वी में हुई पानीपत की पहली लड़ाई के बाद इस क़िले पर मुग़लों का कब्ज़ा हो गया। उस समय ये बहुत ख़राब हालत में था। 1565 में बादशाह अकबर के राज में एक शहर के रूप में इसे फिर से खड़ा किया गया।

इसके बाद अगले बादशाह जहाँगीर और फिर शाहजहाँ ने इस क़िले में अपनी पसंद के हिसाब से बहुत से बदलाव किए। 1638 में अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली ले जाने से पहले तक मुग़ल इसी क़िले में रहे।

क्योंकि इस क़िले का ज्यादातर हिस्सा भारतीय सेना के पास है इसलिए इसका कुछ हिस्सा ही देखा जा सकता है। मुझे लगता है कि जितना भी हिस्सा देखने वालों के लिए खुला है उसे देखने तो ज़रूर जाना चाहिए। एक कारण और है इस क़िले को देखने का, वो ये कि आगरे का किला एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है।

आगरे का किला क्यों बनवाया गया

अपने राज के दौरान बादशाह अकबर को आगरा शहर राजनीतिक कारणों से बिल्कुल सटीक लगा। आगरा के क़िले को जिस रूप में हम आज देखते हैं वह मुग़ल बादशाह अकबर ने 1573 में तैयार करवाया था। उस समय इसे शाही परिवार के रहने के लिए और राज्य के बाकी कामों के लिए सही जगह माना गया था।

शाहजहाँ ने अपने समय में इस क़िले में बहुत सी सफेद संगमरमर की इमारतें बनवाईं। उसके बाद औरंगज़ेब ने इसमें कुछ और बदलाव करते हुए क़िले के चारों ओर ऊंची दीवारें और सुरक्षा के लिए खाई बनवाई। इससे ये क़िला और मज़बूत हुआ।

आगरा के क़िले के अंदर क्या है

पुराने समय में आगरा के क़िले के अंदर कई सौ इमारतें थी पर शाहजहाँ ने अपने पसंद की इमारतें बनवाने के लिए और फिर 19वीं सदी में अंग्रेजों ने बैरक बनवाने के लिए इसमें बहुत सी तोड़ फोड़ की। क़िले के अंदर जो इमारतें हम आज देखते हैं ये वो इमारतें हैं जो  इन सब से किसी तरह बच गईं। ये किला अर्धगोलाकार में बना हुआ है और इसके चारों तरफ 21 मीटर ऊंची दीवारें हैं।

अमर सिंह गेट से अंदर दाखिल होने के बाद एक और गेट आता है जो थोड़े ऊँचे रास्ते की तरफ ले जाता है। इस रास्ते के दोनों तरफ दीवारें बनी हुई हैं जिनमें अब काफी फेरबदल हो चुकी है। पर इनमें एक छोटा सा हिस्सा ऐसा भी है जिसे देख कर क़िले की पुराने समय की दीवारों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जहाँगीर का हौज़

जहाँगीरी महल के सामने ही एक बड़ा सा हौज़ रखा हुआ है जिसे बादशाह जहाँगीर इस्तेमाल किया करता था। यह 5 फुट ऊंचा है और सुविधा अनुसार एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता था।

जहाँगीरी महल

जहाँगीरी महल का दरवाज़ा, झरोखे, उनकी बनावट और कला देखकर मुझे राजस्थान के महलों की याद आ गई। यह महल लाल पत्थरों से बना हुआ है इसके खंभों पर हुई  नक्काशी देख कर ही पता चलता है कि उस समय कारीगरों ने इन पर कितनी मेहनत की होगी। यह महल का ज़नाना हिस्सा है जहां औरतें रहा करती थीं।

खास महल 

खास महल वह जगह है जहां बादशाह शाहजहाँ अपनी पत्नी मुमताज महल के साथ रहता था। बेशकीमती पत्थरों, हीरे-मोतियों और धातुओं से सजा हुआ सफेद संगमरमर का यह महल किसी समय में बहुत ज़्यादा शानदार रहा होगा। फूल-पत्तियों के डिज़ाइन को इसकी खूबसूरती बढ़ाने के लिए दीवारों पर बखूबी इस्तेमाल किया गया है।

इसके दोनों तरफ डोली जैसी दिखने वाले इमारतें बनी है जिनका इस्तेमाल शाहजहाँ की बेटियां रोशनआरा और जहांनआरा किया करती थीं।

अंगूरी बाग

क़िले के अंदर एक बहुत बड़ा और खूबसूरत बगीचा है जिसे अंगूर उगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। पास ही हरम या ज़नाना है, वह जगह जहां औरतें रहा करती थीं।

दीवान-ए-आम

क़िले के अंदर दाखिल होने के साथ ही दीवान-ए-आम नज़र आता है। यह तीन तरफ से खुला हुआ है और चौथी तरफ बादशाह के बैठने के लिए ऊंचा स्थान बना हुआ है। इस हॉल में बादशाह आपने राज्य के आम लोगों से मिला करता था और उनकी फरियादें  सुनता था। एक जैसे दिखने वाले कई खंभे और मेहराबें इस हॉल को आकर्षक बनाते हैं।

मुसम्मन बुर्ज

मुसम्मन बुर्ज महल के बाईं तरफ बना हुआ है। सफेद संगमरमर से बने इस बुर्ज में शाहजहाँ के बेटे औरंगज़ेब ने शाहजहाँ को क़ैद कर रखा था। इसके अंदर एक फव्वारा लगा हुआ है और खूबसूरत नक्काशी इसकी सुंदरता को और बढ़ाती है। कहते हैं कि  शाहजहाँ ने यहां से ताजमहल को देखते हुए और अपनी पत्नी को याद करते हुए अपनी बाकी की सारी उम्र गुज़ार दी।

दीवान-ए-ख़ास 

दीवान-ए-ख़ास वह जगह है जहाँ बादशाह अपने मंत्रियों और खास मेहमानों से मिलता था। यह मुसम्मन बुर्ज के पास ही है। कीमती पत्थरों और धातुओं से इस हॉल को सजाया गया था जो कि बादशाह से मिलने वाले खास मेहमानों पर बहुत अच्छा प्रभाव डालता था।

पूरी दुनिया में प्रसिद्ध ‘तख्त-ए-ताउस’ (पीकॉक थ्रोन) जो कि सोने से बना और बेशकीमती पत्थरों से सजा हुआ था, कभी इस दरबार की शान हुआ करता था। इस तख़्त को पर्शियन लुटेरे नादिर शाह ने दिल्ली के लाल क़िले से 1739 में लूट लिया।

नगीना मस्जिद

यह मस्जिद शाहजहाँ द्वारा क़िले के अंदर बनवाई गई थी। सफेद संगमरमर से बनी इस मस्जिद को ‘ज्वेल मॉस्क’ नाम से भी जाना जाता है।

मीना मस्जिद

मीना मस्जिद को भी शाहजहाँ ने बनवाया था अपने निजी इस्तेमाल के लिए। कहते हैं कि मुसम्मन बुर्ज में कैद के दौरान बादशाह यहीं से नमाज़ पढ़ा करता था।

मच्छी भवन

मच्छी भवन एक दो-मंज़िला इमारत है जो कि एक खुले मैदान के आसपास बनी हुई है। इसमें बहुत से कमरे और बरामदे हैं। पुराने समय में यहाँ बहुत से फव्वारे और मछलियों के तालाब हुआ करते थे। इसी वजह से इसका नाम ‘मच्छी भवन’ पड़ा।

शीश महल

शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया यह शीश महल अब आम लोगों के लिए बंद है। किसी समय में इस महल की दीवारों और छत पर सोने का काम किया गया था। जब यहां लगे हुए छोटे-छोटे शीशों पर रोशनी पड़ती थी तो एक अलग ही जादुई माहौल बन जाता था। यहां लगी हुई हर कीमती चीज को लूट लिया गया और आम लोगों ने भी इसमें काफ़ी तोड़ फोड़ की जिसके बाद इसे बंद कर दिया गया। 

आगरा का किला देखने का सबसे अच्छा समय

नवंबर से फरवरी का समय आगरा का किला देखने के लिए सबसे अच्छा समय है। यहाँ घूमते हुए काफी पैदल चलना पड़ता है और गर्मियों के मौसम में यह मुश्किल हो सकता है। 

खुलने का समय और एंट्री फीस

  • आगरा का किला सूर्योदय से सूर्यास्त तक हर रोज़ खुलता है।
  • भारतीय लोगों के लिए एंट्री फी ₹50 और विदेशी लोगों के लिए ₹650 है। ( कैश लैस ट्रांजैक्शन के लिए ₹35 और ₹550)
  • 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए एंट्री फ्री है।

आगरे के क़िले तक कैसे पहुंचे

आगरे का किला देश की राजधानी दिल्ली से तकरीबन 200 किलोमीटर दूर आगरा शहर में स्थित है। एक प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेस होने की वजह से यह देश के अन्य मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है। यहाँ ट्रेन और बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है। खेरिया एयरपोर्ट आगरा का सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है जो कि शहर से तकरीबन 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

सबसे नज़दीकी बस स्टेशन है, ईदगाह बस स्टैंड। जब आप आगरा पहुंच जाएं तो यहां से टैक्सी या ऑटो रिक्शा लेकर आगरा क़िले तक आसानी से जाया जा सकता है।

आगरा के क़िले में कितने गेट हैं

पुराने समय में आगरा के क़िले में चार गेट हुआ करते थे पर अभी सिर्फ दो गेट हैं दिल्ली गेट और लाहौर गेट। क्योंकि क़िले का उत्तरी हिस्सा भारतीय सेना के इस्तेमाल में है इसलिए दिल्ली गेट आम लोगों के लिए बंद है। लोगों को यहां आने के लिए लाहौरी गेट का इस्तेमाल करना होता है जिसे अमर सिंह गेट भी कहा जाता है। क़िले के अंदर एक और गेट है जिसे हाथी गेट कहते हैं।

FAQs

आगरा का किला कहां है

आगरा का किला उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में रकाबगंज में स्थित है।

आगरा क़िले के अंदर पानी और टॉयलेट सुविधा

क़िले के अंदर पीने का पानी और टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध है।

आगरा क़िले के अंदर व्हीलचेयर

क़िले में जाने के लिए व्हीलचेयर की सेवा उपलब्ध है और ज्यादातर जगहों पर व्हीलचेयर से जाया जा सकता है।

क्या आगरा के क़िले में घूमने के लिए गाइड ज़रूरी है

अगर आप यहाँ सिर्फ तस्वीरें खींचने के लिए नहीं जा रहे हैं तो मेरा आपको सुझाव रहेगा कि आप गाइड ज़रूर लें। इससे आपकी क़िले में रुचि बढ़ेगी और आपको बहुत सी जानकारी भी मिलेगी। इस बात का ध्यान रखें कि आप गाइड के आईडेंटिटी कार्ड ज़रूर चेक करें।

साउंड एंड लाइट शो 

आगरा के क़िले में साउंड एंड लाइट शो 

सूर्यास्त के बाद शाम को क़िले में साउंड एंड लाइट शो का आयोजन भी होता है जिसमें  आगरा के क़िले के इतिहास के बारे में जानकारी दी जाती है। इस शो की टिकट की कीमत भारतीय लोगों के लिए ₹70 और विदेशियों के लिए ₹200 हैं। शो शुरू होने से पहले वहीं से टिकट खरीदी जा सकती है।

क्या आगरा में ओला कैब सर्विस उपलब्ध है

हां, आगरा में ओला कैब सर्विस उपलब्ध है।

दिल्ली से आगरा पहुंचने में कितना समय लगता है

बस से दिल्ली से आगरा पहुंचने के लिए तकरीबन 3 से 4 घंटे का समय लग सकता है और ट्रेन से तकरीबन 2 से 3 घंटे। इसके बारे में और जानने के लिए यहां क्लिक करें.

आगरा का किला कब बंद रहता है

आगरा का किला हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है, नेशनल हॉलिडे पर भी।

आगरा का किला घूमने में कितना समय लगता है

आगरा का किला घूमने के लिए 2 से 3 घंटे का समय काफी है। यह इतिहास, फोटोग्राफी और वास्तुकला में आपकी रूचि पर भी निर्भर करता है कि आपको यहाँ कितना समय लगेगा।

आगरा का किला घूमने के टिप्स

  • अगर आप गर्मियों में आगरा का किला घूमने जाएं तो अपने साथ पानी की बोतल, धूप का चश्मा और सर ढकने के लिए कुछ ज़रूर रखें।
  • गर्मी के मौसम में सुबह का समय आगरा का किला देखने के लिए बेहतर रहेगा।
  • आरामदायक जूते पहने ताकि आपको ज़्यादा चलने में दिक्कत ना हो।

आगरा के क़िले का इतिहास बहुत पुराना है और बहुत से शासकों जैसे कि लोधी सल्तनत, सूरी सल्तनत, मुग़ल, मराठा और अंग्रेजों ने इस पर राज किया है। आगरा के क़िले में घूम कर मुझे इस बात का एहसास हुआ कि इतिहास कितना रोचक हो सकता है अगर आप इसे सिर्फ किताबों में पढ़ने की जगह असल में अपनी नज़रों से देखें और जानने की कोशिश करें।

आपको आगरा के क़िले को अपनी ‘भारत में घूमने लायक जगहों’ की लिस्ट में ज़रूर शामिल करना चाहिए।

आगरे का किला वास्तुशिल्प का एक नायाब नमूना है जिसमें मुग़ल और पर्शियन वास्तुकला का बेहद खूबसूरत मेल है। इसमें कहीं-कहीं ग्वालियर, बंगाली और राजस्थानी वास्तुकला का असर भी दिखाई देता है। अलग-अलग शासकों के राज के दौरान इस क़िले में बहुत से बदलाव हुए जो आज भी देखे जा सकते हैं। और पढ़ने के लिए क्लिक करे #agrafort #agrafortphotography #agrafortarchitecture #agrafortindia #agraforttravel #incredibleindia #indiantourism
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