त्रिउंड ट्रेक(Triund Trek): हिमाचल प्रदेश का आसान पर रोमांचक ट्रेक।

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मैं दिल से एक हिप्पी हूं। पहाड़ों और घाटियों के बीच, तारों भरे आसमान के नीचे रात गुजारने के लालच से बचना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।

हिमाचल प्रदेश का त्रिउंड ट्रेक मेरा पहला ट्रैक था। ऊंचे-नीचे देवदार और बुरांश से भरे, पथरीली पगडंडियों की ओर जाते घुमावदार रास्ते अभी तक मेरे ज़हन में ताजा हैं।

मैं दिल से एक हिप्पी हूं। पहाड़ों और घाटियों के बीच, तारों भरे आसमान के नीचे रात गुजारने के लालच से बचना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।हिमाचल प्रदेश का त्रिउंड ट्रेक मेरा पहला ट्रैक था। ऊंचे-नीचे देवदार और बुरांश से भरे, पथरीली पगडंडियों की ओर जाते घुमावदार रास्ते अभी तक मेरे ज़हन में ताजा हैं।जब मैंने इस खूबसूरत ट्रेक पर अपने दोस्त के साथ जाने का निर्णय लिया तो पहला सवाल मेरे दिमाग में यही आया कि क्या यह ट्रैक मुश्किल होगा? अगर इस ट्रेक के इलाके की बात की जाए तो यह ट्रेक आसान है। 1 से 10 अंकों के कठिनाई के मापदंड पर यह ट्रैक 4 पर है। पहली बार ट्रेक करने वालों के लिए और परिवार के लिए यह बढ़िया ट्रेक है।और पढ़ने के लिए क्लिक करें #lighttravelaction #triundtrek #त्रिउंडहिमाचलप्रदेश #त्रिउंडकहाहै #त्रिउंडधर्मशाला

जब मैंने इस खूबसूरत ट्रेक पर अपने दोस्त के साथ जाने का निर्णय लिया तो पहला सवाल मेरे दिमाग में यही आया कि क्या यह ट्रैक मुश्किल होगा?

अगर इस ट्रेक के इलाके की बात की जाए तो यह ट्रेक आसान है।

1 से 10 अंकों के कठिनाई के मापदंड पर यह ट्रैक 4 पर है। पहली बार ट्रेक करने वालों के लिए और परिवार के लिए यह बढ़िया ट्रेक है।

7 साल की उम्र से ऊपर के बच्चे भी इसे कर सकते हैं।

यदि आप शारीरिक रूप से ज्यादा एक्टिव नहीं है तो आपको यह ट्रक थोड़ा मुश्किल लग सकता है पर बीच-बीच में रुक कर आराम कर के आप इसे पूरा कर सकते हैं।

इस ट्रक के बारे में जितना मैंने अभी तक आपको बताया है, उससे कहीं ज्यादा और भी है इसके बारे में जानने के लिए। अगर आप यहां जाने से पहले इसके बारे में और जानना चाहते हैं  तो आगे पढ़ें।

इस ट्रेक पर हर किलोमीटर पर बदलते मौसम के साथ हमने कंपकंपाती ठंडी हवा और बारिश की फुहारें महसूस कीं, साथ ही चमचमाते सूरज को देखा।

त्रिउंड ट्रेक की ऊंचाई कितनी है?

त्रिउंड ट्रेक धौलाधार पर्वत श्रृंखला की तलहटी में बसा है और समुद्र तल से 2828 मीटर (9278 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह एक हाई एल्टीट्यूड ट्रैक है। इस ट्रैक का अधिकतर भाग का चढ़ाई वाला है। आखिर के 2 किलोमीटर के रास्ते में, स्नोलाइन कैफे से खड़ी चढ़ाई है।

एल्टीट्यूड Altitude (ऊंचाई) को इन मापदंडों से परिभाषित किया जाता है-

  • हाई एल्टीट्यूड : 8000 से 12000 फीट (2438 से 3658 मीटर)
  • वेरी हाई एल्टीट्यूड: 12000 से 18000 फीट (3658 से 5487 मीटर)
  • एक्सट्रीमली हाई एल्टीट्यूड: 18000 फ़ीट से ऊपर (5500 मीटर से ऊपर)

ज्यादातर लोग बिना किसी खास तकलीफ के 8000 फीट (2438 मीटर) की ऊंचाई तक जा सकते हैं। अगर आप पहले भी उस ऊंचाई पर जा चुके हैं और आपको उसमें कोई दिक्कत नहीं हुई तो आप दोबारा उसी ऊंचाई पर बिना किसी मुश्किल के जा सकते हैं।

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पर इसके लिए ज़रूरी है कि आप सही से एक्लाइमेटाइजड  (acclimatized) हों।

त्रिउंड ट्रेक कितना लंबा है?

धर्मकोट से ट्रेक तकरीबन 7 किलोमीटर दूर है और कैंपिंग साइट तक पहुंचने के लिए तकरीबन 3 से 6 घंटे का समय लग सकता है। जो लोग ट्रैकिंग में नए हैं और पहाड़ी रास्तों के आदी नहीं हैं, उन्हें ट्रेक के दौरान विश्राम की ज़रूरत हो सकती है। उन्हें इसमें 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है।

त्रिउंड ट्रेक की ऊंचाई पर पहुंचने के लोकप्रिय रास्ते हैं-

  • मैक्लोडगंज/धर्मकोट- भागसुनाग-शिवा कैफे- त्रिउंड
  • धर्मकोट-त्रिउंड

ज्यादातर लोग ट्रेक की शुरुआत के लिए मैक्लोडगंज को चुनते हैं जहां से यह 9 किलोमीटर की दूरी पर है या धर्मकोट जो कि मैक्लोडगंज से 2 किलोमीटर की दूरी पर है। और वहां से यह ट्रैक 7 किलोमीटर का है।

यह मेरा पहला ट्रेक था और मुझे मैक्लोडगंज से ट्रेक शिखर के 9 किलोमीटर के रास्ते को तय करने में 5 घंटे का समय लगा। इस दौरान बीच-बीच में मैं कई बार थोड़ा आराम करने और आसपास के मनोरम दृश्यों को देखने के लिए रुकी।

हमने अपना ट्रेक मैकलोडगंज से शुरू किया और अपने गाइड को धर्मकोट में मिले। यहां से ट्रेक का रास्ता गल्लू देवी मंदिर की ओर जाता है जो कि कई लोगों के लिए इस ट्रैक का स्टार्टिंग पॉइंट है।

कुछ लोग ट्रैक को धर्मशाला से शुरू करना भी पसंद करते हैं जहां पर भागसुनाग स्टार्टिंग प्वाइंट है।

धर्मकोट एक छोटा सा शांत हिल स्टेशन है जहां पहुंचने वाली एक ही सड़क गांव के शुरू होते ही खत्म हो जाती है।

क्या त्रिउंड ट्रेक को 1 दिन में पूरा किया जा सकता है?

हां, बिल्कुल। इस ट्रैक को 1 दिन में पूरा किया जा सकता है। आप इसे सुबह जल्दी शुरू कर सकते हैं ताकि आप दोपहर तक ऊपर पहुंच कर उस जगह की खूबसूरती और प्रकृति का आनंद ले सकें और शाम को सूरज ढलने से पहले वापसी की शुरुआत कर सकें।

हालांकि अपने निजी अनुभव से मेरा सुझाव यही रहेगा कि आप कम से कम एक रात वहां टेंट के अंदर, लाखों सितारों के नीचे अपने कंबल की गर्माहट के बीच, धौलाधार पहाड़ियों के परिदृश्य में बोन फायर का आनंद उठाएं और अगली सुबह वापसी करें।

आप यकीनन बाद में इसके लिए मुझे धन्यवाद कहना चाहेंगे।

क्या त्रिउंड ट्रेक सुरक्षित है?

बिल्कुल। यह ट्रेक बहुत सुरक्षित है और अकेले ट्रेकिंग करने वाले लोगों और महिलाओं के बीच बहुत आम और लोकप्रिय भी है। इस ट्रैक की खास बात यह है कि यह बच्चों के लिए भी सुरक्षित है। बस अपने साथ पीने का पानी और कुछ खाने की चीजें रखें और आप इस ट्रेक के लिए तैयार हैं।

यहां तकरीबन हर 1 किलोमीटर की दूरी पर पानी और नाश्ते के लिए कैफे हैं।

त्रिउंड ट्रेक के लिए सबसे बढ़िया समय कौन सा है?

जहां तक दिन के समय की बात है तो मेरा सुझाव होगा कि आप इस ट्रेक को सुबह जल्दी से जल्दी शुरू करें ताकि आप भीड़-भाड़ से बचते हुए दोपहर तक यहां पहुंच सके और इस जगह की खूबसूरती का आनंद ले सकें।

और अगर आप चाहे तो सुबह कुछ देर से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं। जैसे मैंने तकरीबन सुबह 10:00 बजे शुरू किया ताकि सूरज ढलने से पहले वहां पहुंचा जा सके और रात वही गुजार सकें। अगली सुबह आप वापसी कर सकते हैं।

जहां तक सबसे बढ़िया मौसम की बात है तो इस ट्रेक को साल में कभी भी किया जा सकता है। मई से जून और सितंबर के अंत से नवंबर तक का समय यहां के लिए बहुत बढ़िया है क्योंकि उस वक्त मौसम सुहावना रहता है।  

सर्दियों के समय यहां काफी भारी बर्फबारी होती है जिसकी वजह से नए ट्रेकर्स के लिए ट्रेक करना काफी मुश्किल हो जाता है। बरसात का मौसम मुझे यहां जाने के लिए सही समय नहीं लगता।

क्या त्रिउंड ट्रेक मॉनसून/बरसात के मौसम में सुरक्षित है?

वैसे तो त्रिउंड ट्रेक मॉनसून के दौरान भी सुरक्षित है पर आखिर के 2 किलोमीटर का रास्ता काफी पथरीला और फिसलन भरा हो सकता है।

अगर आप इस मौसम में ट्रेक के लिए जाते हैं तो सही रहेगा कि बारिश के दौरान आप किसी ढाबे पर कुछ देर के लिए रुक जायें।

और अगर आप पहली बार ट्रेक कर रहे हैं तो बारिश के मौसम में और सर्दियों में न जायें तो ही बेहतर है।

मैंने यह ट्रेक अगस्त के महीने में किया जब धर्मशाला में बरसात का मौसम होता है।

कई बार हल्की और मध्यम बरसात हुई जिससे मौसम और सुहावना और खूबसूरत हो गया।

ध्यान रखें कि ऐसे मौसम में एंटी-स्किड जूते पहनें और बरसात से बचने के लिए जरूरी सामान अपने साथ रखें।

त्रिउंड ट्रेक के लिए क्या क्या साथ ले जाएं?

ट्रेक की तैयारी से पहले सही रहेगा कि आप त्रिउंड के मौसम और तापमान को ध्यान में रखें। इसी पर निर्भर करेगा कि आप अपने बैकपैक में क्या-क्या साथ ले जाएं। जैसे कि-

  • जैकेट/गर्म कपड़े
  • रेनकोट
  • बूट्स/हाइकिंग शूज
  • दस्ताने
  • आरामदायक कपड़े

जरूरत का अन्य सामान भी साथ रखें जैसे कि-

  • टॉर्च
  • दवाइयां
  • छोटा तौलिया
  • साबुन इत्यादि
  • आर्मी नाइफ/ चाकू 
  • सनस्क्रीन
  • सनग्लासेस/ धूप का चश्मा 
  • खाने के लिए
  • एनर्जी बार्ज़
  • पानी
  • खाने के लिए कुछ स्नैक्स
  • अगर साथ ले जाना चाहें तो-
  • कैमरा
  • वॉलेट/ बटुआ
  • आई डी कार्ड/ पहचान पत्र
  • पढ़ने के लिए किताबें

त्रिउंड ट्रेक बेस कैंप कैसे पहुंचे? (मैकलोडगंज/ धर्मशाला)

  • बेस कैंप: धर्मशाला
  • निकटतम एयरपोर्ट: गग्गल एयरपोर्ट (13 किलोमीटर)
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट रेलवे स्टेशन (85 किलोमीटर)
  • बेस कैंप: मैकलोडगंज
  • निकटतम एयरपोर्ट: गग्गल एयरपोर्ट (18 किलोमीटर)
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: पठानकोट रेलवे स्टेशन (89 किलोमीटर) 

दिल्ली से ट्रेन से सफर करते हुए मैं पठानकोट रेलवे स्टेशन पहुंची। वहां से मैं एक कैब ले कर अप्पर मैक्लोडगंज स्थित अपने ठहरने के स्थान पर पहुंची। मुझे वहां पहुंचने में तकरीबन ढाई से 3 घंटे का समय लगा।

धरमशाला/ मैकलोडगंज कैसे पहुंचें?

गग्गल एयरपोर्ट (जिसे कांगड़ा एयरपोर्ट भी कहा जाता है) के लिए एयर इंडिया और स्पाइसजेट की उड़ानें उपलब्ध हैं। यह धर्मकोट का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।

गग्गल एयरपोर्ट से मैकलोडगंज की दूरी तकरीबन 20 किलोमीटर (12.4 मील) की है और टैक्सी से यहां पहुंचने के लिए तकरीबन 45 मिनट का समय लगता है।

धर्मकोट के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं- पठानकोट और चक्की बैंक। चक्की बैंक पठानकोट के नजदीक बहुत ही छोटा सा स्टेशन है। पठानकोट पहुंचने के बाद आप टैक्सी या बस ले सकते हैं।

टैक्सी (आरामदायक, सबसे जल्दी पहुँचाने वाला साधन, पर थोड़ा खर्चीला भी): टेक्सी द्वारा यहां पहुंचने में ट्रैफिक के हिसाब से तकरीबन ढाई घंटे का समय लग सकता है, पर खर्चा ज्यादा होगा।

बस (सस्ता साधन पर भीड़-भाड़ वाला): रास्ते में हर स्टॉप पर रुकते हुए बस तकरीबन 4 से 5 घंटे का समय लेती है।

दिल्ली, चंडीगढ़ और पठानकोट से धर्मशाला के लिए डीलक्स बस सर्विस उपलब्ध है। हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन की हिमसुता एसी वोल्वो (2 + 2 सीटर), 1272 रुपए में www.redbus.in पर एक बहुत ही लोकप्रिय विकल्प है।

दिल्ली के ट्रैफिक से बचने के लिए आप दिल्ली आईएसबीटी कश्मीरी गेट के लिए येलो लाइन मेट्रो भी ले सकते हैं। यहां से बसें रात के तकरीबन 8 बजे चल कर अगली सुबह 7.30 बजे मैकलोडगंज पहुंचती हैं।

क्या कार से त्रिउंड पहुंचा जा सकता है?

नहीं, कार द्वारा त्रिउंड पहुंचने के लिए कोई सुविधा या रास्ता उपलब्ध नहीं है। यह ट्रेक पैदल चल कर ही  गाइड के साथ या गाइड के बिना, आप अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार कर सकते हैं।

त्रिउंड ट्रेक इटिनेरारी

जब आपने ट्रेक शुरू करने का प्लान किया हो उससे कम से कम 1 दिन पहले मैक्लोडगंज पहुंचें।

अगली सुबह ताजगी के साथ मैकलोडगंज या धर्मकोट से (जैसा आपके ट्रैकिंग गाइड ने इंतजाम किया हो) अपने ट्रेक की शुरुआत करें।

बुरांश, बलूत और देवदार से घिरे हुए रास्तों पर अपने खूबसूरत सफर की ओर बढ़ें।

ट्रेक साइट पर पहुँच कर रात को वहीँ ठहरें।  (टेन्ट या सरकारी गेस्ट हाउस में )

बर्फ से ढके धौलाधार और धर्मशाला के मनमोहक दृश्यों को ऊंचाई से निहारें और उस का आनंद लें।

सुबह कैंप साइट पर ही नाश्ता करें। आप यहां गरमा-गरम मैगी या गाइड द्वारा उपलब्ध करवाए गए खाने का मज़ा ले सकते हैं।

आप चाहें तो आसपास घूम सकते हैं। तस्वीरें ले कर इस ट्रेक की यादें संजो सकते हैं।

इसके बाद अगर आपका 5 किलोमीटर आगे स्नोलाइन पर जाने का इरादा हो तो आप सुबह जल्दी निकल सकते हैं या फिर नाश्ते के बाद मैक्लोडगंज के लिए वापसी की शुरुआत कर सकते हैं।

त्रिउंड ट्रेक के लिए तैयारी कैसे करें?

इस ट्रेक के लिए आपको कुछ तैयारी पहले से ही करनी पड़ेगी।

त्रिउंड के मौसम और तापमान का ध्यान रखें और अपने लिए कपड़े उसी हिसाब से पैक करें।

अपने ठहरने का स्थान सुनिश्चित करें-  त्रिउंड में टेंट्स या सरकारी गेस्ट हाउस।

जरूरत का आम सामान जैसे कि खाना इत्यादि अपने पास ही रखें ताकि जब भी आपको इसकी जरूरत हो आप इसका उपयोग कर सकें।

इस ट्रेक के लिए आपका स्वस्थ होना आवश्यक है।

मेरा सुझाव रहेगा कि आप इस ट्रेक से तीन- चार हफ्ते पहले, हफ्ते में कम से कम तीन से चार बार लंबी सैर (5 से 7 किलोमीटर) करने की आदत डालें।

क्या इस ट्रेक के लिए गाइड आवश्यक है?

त्रिउंड ट्रेक के लिए गाइड आवश्यक नहीं है। बहुत से ऐसे लोग हैं जो अकेले पहली बार यह ट्रेक करते हैं, वह भी बिना किसी गाइड के। त्रिउंड ट्रेक के रास्ते में दर्शाए गए दिशा-निर्देश इसे और आसान बना देते हैं। रास्ते में आते-जाते आपको बहुत से ट्रेकिंग करने वाले लोगों का साथ मिल जाएगा।

क्योंकि यह हमारा पहला ट्रैक था इसलिए अपना हौसला बनाए रखने के लिए और अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हमने एक गाइड लिया। वह पूरे सफर के दौरान हमारे साथ रहा और उसने हमारे खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की।

धर्मकोट में ऐसे बहुत से गेस्टहाउसेस हैं जहां पर आप ट्रेक से पहले तैयार होने के लिए कमरा ले सकते हैं। अगर आप प्लांड ट्रैक (Planned Trek) लेते हैं तो आपके लिए गाइड, खाना-पीना  और कैंपिंग नाइट के लिए स्लीपिंग बैग की व्यवस्था उनके द्वारा ही कर दी जाती है।

अगर आप गाइड के साथ नहीं जाना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि आप अपने साथ टेंट, खाने-पीने का सामान और रात को रुकने के लिए स्लीपिंग बैग लेकर चलें।

Triund शिखर पर रात को रुकने के लिए टेंट कहां से लें?

आप शिखर पर पहुंचने के बाद आसानी से कैंप ओनर (Camp Owner) से ₹300 से ₹500 में टेंट ले सकते हैं। हमें वहां पहुंचने के बाद इसके बारे में पता चला।

और अगर आप पहले से ही गाइड की सहायता लेते हैं तो वह आपके लिए इन सब चीजों का इंतजाम खुद ही कर देगा।

Triund trek tips ट्रेक के लिए टिप्स

  • ट्रेक के दौरान अपने बैग को हल्का ही रखें नहीं तो आप बुरी तरह थक जाएंगे।
  • अगर आप अकेले सफर कर रहे हैं या रात को रुकना चाहें तो सुनिश्चित करें कि आप स्लीपिंग बैग और टेंट या तो साथ लेकर चलें या इसका इंतजाम पहले ही कर ले।
  • त्रिउंड के फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में कमरा बुक करने के लिए पहले से ही धर्मशाला में कंजरवेटर फॉरेस्ट (Conservator Forest) के दफ्तर में संपर्क कर लें।
  • अगर आप अकेले सफर कर रहे हैं और आप को ट्रेक के रास्तों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो आपको रास्ते में किसी की मदद की जरूरत पड़ सकती ‌ है।
  • ट्रेक के रास्ते से हटकर नई पगडंडियों की तरफ जाने की कोशिश ना करें। आम रास्ते पर ही चलें।
  • ट्रेकिंग पोल (Treking Pole) साथ ले जाना जरूरी नहीं है पर फिसलन भरे पत्थरों पर यह बहुत मददगार साबित हो सकता है। Amazon पर उपलब्ध मज़बूत पर हल्के Anti-shock spring mechanism वाले Coleman trekking pole इसके लिए बहुत बढ़िया हैं। 
  • कचरा इकट्ठा करने के लिए अपने साथ एक अलग थैला या लिफाफा रखें और यहाँ- वहाँ गंदगी न फैलाएं। इस जगह की गंदी हालत होते देख कर बहुत अफसोस होता है।
  • रास्ते में पड़ने वाली दुकानों पर मिलने वाला खाना काफी महंगा है। अपने साथ इतना खाना जरूर रखें जो कि आपको इस ट्रेक में काम आए पर ज़्यादा वज़न रखने से बचें।
  • साथी ट्रेकर्स के साथ कम्पीट करने की कोशिश ना करें। एक निश्चित गति बनाए रखें और अगर रास्ते में सांस फूलने लगे तो रुक कर विश्राम करें।
  • अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखें। पानी और ग्लूकोस इसमें आपकी मदद करेगा। आरामदायक कपड़े पहनें  और उतना ही सामान साथ लें जो आप आसानी से ले जा सकें। 
  • अपने आसपास के खूबसूरत नज़ारों का मज़ा लें, यादगार पल बनाएं, तस्वीरें लें, और सुरक्षित रहें।

धर्मशाला में ठहरने की जगह

अगर आप कम बजट में ठहरने की जगह तलाश रहे हैं तो धर्मशाला में खनियारा रोड पर स्थित होबो हॉस्टल (Hobo Hostel ) देख सकते हैं। यहां आपको 24 घंटे फ्रंट डेस्क, शेयर्ड किचन, फ्री वाईफाई और रेस्त्रां की सुविधा मिलेगी। हॉस्टल के बिल्कुल सामने पहाड़ों में एक नदी बहती है और हॉस्टल के बिलकुल बाहर ही लोकल बस रूट है।

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यदि आप ग्लैम्पिंग का शौक रखते हों तो शांति और विलासिता का मजा एकसाथ लेने के लिए आप कैंप धर्मशाला (Camp Dharamshala ) को चुन सकते हैं। हाइकिंग के लिए यह बहुत ही लोकप्रिय जगह है। कैंप धर्मशाला में आपको बाइक और कार किराए पर मिल जाएगी। रिव्यूज, कीमत और अधिक जानकारी के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं।

नोट: ग्लैंपिंग कैंपिंग का ही एक रूप है बस पारंपरिक कैंपिंग से कहीं अधिक विलासिता से परिपूर्ण सुविधाओं के साथ।

अगर आप एक शांत रिज़ॉर्ट की तलाश में है जहां आसपास नदी के बहते पानी और पक्षियों के चहकने की आवाज़ें हों तो प्रकृति आलय ( Prakriti Aalay ) आपके लिए बिल्कुल सही जगह है। आराम फरमाने और सुस्ताने के लिए यह बहुत बढ़िया स्थान है।

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अगर यह आपका पहला ट्रेक है तो याद रखें किसी भी सफर की शुरुआत एक कदम से ही होती है और असंभव यात्रा सिर्फ वह है जो आपने कभी शुरू ही ना की हो।

चढ़ाई चाहे मुश्किल हो पर यह ट्रेक आपको ताज़गी और जीत के एहसास से भर देगा।

मैं दिल से एक हिप्पी हूं। पहाड़ों और घाटियों के बीच, तारों भरे आसमान के नीचे रात गुजारने के लालच से बचना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।हिमाचल प्रदेश का त्रिउंड ट्रेक मेरा पहला ट्रैक था। ऊंचे-नीचे देवदार और बुरांश से भरे, पथरीली पगडंडियों की ओर जाते घुमावदार रास्ते अभी तक मेरे ज़हन में ताजा हैं।जब मैंने इस खूबसूरत ट्रेक पर अपने दोस्त के साथ जाने का निर्णय लिया तो पहला सवाल मेरे दिमाग में यही आया कि क्या यह ट्रैक मुश्किल होगा? अगर इस ट्रेक के इलाके की बात की जाए तो यह ट्रेक आसान है। 1 से 10 अंकों के कठिनाई के मापदंड पर यह ट्रैक 4 पर है। पहली बार ट्रेक करने वालों के लिए और परिवार के लिए यह बढ़िया ट्रेक है।और पढ़ने के लिए क्लिक करें #lighttravelaction #triundtrek #त्रिउंडहिमाचलप्रदेश #त्रिउंडकहाहै #त्रिउंडधर्मशाला
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This post was originally written in English by Yukti Malik and can be read by clicking here. This post has been translated in Hindi by Amandeep Kaur.

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